रोजाना24न्यूज: नौजवान समाजसेवी और वाराही फाउंडेशन के अध्यक्ष गुनीत खेड़ा ने बताया कि भारत जैसे देश में जब भारत माता का उल्लेख होता है तो वे एक चित्र या बात तक सीमित ना रह कर एक भावना बन जाती है। “भारत माता की जय” के उदघोष को किसी संगठन या पार्टी विशेष के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि मन में एक-एक देश वासी की जय होने का भाव ही भारत माता की जय का संपूर्ण अर्थ है।
‘भारत माता की जय’ भारतीय स्वाधीनता संग्राम के समय सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाला नारा था। अथर्वेद के पृथ्वी सूक्त में पृथ्वी को माता कहा गया है और उसके गुणों का गान है। हम सब भारतीय भी अपनी भारत भूमि की वंदना भारत माता के रूप में करते हैं, लेकिन आज के समय में ‘भारत माता’ का भी राजनीतीकरण हमारे देश में शुरू हो गया है। बुधवार को संसद में राहुल गांधी द्वारा भारत माता की हत्या की बात कहना जहां एक और बहुत ही शर्मनाक है तो वहाँ दूसरी ओर करोड़ों भारत वासियों के लिए आघात है।
सरकार की हर प्रकार की विफ़लता पर टिप्पणी करना विपक्ष का काम है और अच्छे से किया भी जाना चाहिए परंतु टिप्पणी करते वक्त शब्दों की मर्यादा भी बनाए रखनी चाहिए। राहुल गांधी की ‘भारत माता’ पर की गई इस टिप्पणी ने देशवासियों को निराश किया है और उन्हें पूरे संसद में देशवासियों से माफ़ी माँगनी चाहिए।
