जालंधर: जालंधर में एक बार फिर सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाने का बड़ा मामला सामने आया है, जहां बस स्टैंड के पास स्थित एक सील की गई बिल्डिंग में लोगों ने अपनी मनमर्जी से ताले तोड़कर दुकानें खोल दीं। यह वही बिल्डिंग है जिसे कांग्रेस सरकार के दौरान सील किया गया था। अब आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद दुकानों के फिर से खुल जाने से प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी नाकामी दोनों उजागर हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जालंधर बस स्टैंड के पास कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान एक बिल्डिंग को सील किया गया था, जोकि अब आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद फिर से इस बिल्डिंग के अंदर दुकानों को खोल दिया गया। जोकि पंजाब सरकार की नाकामी को दर्शा रही है। इतना ही नहीं जब लोगों द्वारा दुकानों के ताले खुलने पर एतराज जताया गया, तब उल्टा उन्हें ही जान से मारने की धमकियां देनी शुरू कर दी। जिस संबंधी जालंधर के डिप्टी कमिश्नर को शिकायत दी गई थी। यह मामला डीजीपी पंजाब के ध्यान में भी लाया गया है, लेकिन प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

विरोध करने वालों को दी धमकी
जानकारी के मुताबिक जब कुछ स्थानीय लोगों ने दुकानों के ताले तोड़े जाने पर आपत्ति जताई, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां तक दी गईं। इस मामले में जालंधर के डिप्टी कमिश्नर को शिकायत दी गई है, साथ ही यह मामला डीजीपी पंजाब के ध्यान में भी लाया गया है। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
कांग्रेस सरकार के समय की गई थी कार्रवाई
बताया जा रहा है कि कांग्रेस सरकार के दौरान कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने विधायक परगट सिंह की मौजूदगी में खुद इन दुकानों को सील किया था। उस समय तीन दुकानों को बंद किया गया था- जिनमें से एक का ताला तोड़कर सामान बाहर निकाल लिया गया, जबकि दो दुकानें अब भी सील पड़ी हैं।
सत्ता बदलते ही खुल गई बिल्डिंग
सूत्रों के मुताबिक आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद इस सील की गई बिल्डिंग को दोबारा खोल दिया गया। अब इन दुकानों में व्यवसायिक गतिविधियां फिर से शुरू हो गई हैं। प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सवालों के घेरे में प्रशासन
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब एक बार सरकारी आदेश पर सील की गई बिल्डिंग को कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से खोल सकता है, तो यह कानून व्यवस्था पर सीधा सवाल है। प्रशासनिक चुप्पी ने लोगों के मन में सरकार की साख पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या पंजाब सरकार इस खुले उल्लंघन पर कोई कदम उठाएगी — या फिर जालंधर का यह मामला भी कागज़ों में दबकर रह जाएगा।
