रोजाना24न्यूज: आचार्य राज किशोर शर्मा राज गुरुजी ने बताया कि वर्ष की सभी 24 एकादशी में सबसे महत्वपूर्ण देवोत्थान एकादशी होती है। इसे हरि प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस वर्ष देवोत्थान एकादशी 4 नवंबर शुक्रवार को मनाई जाएगी। आपको बता दें कि धर्म ग्रंथों के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी 10 जुलाई को थी इस दिन जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु जगत कल्याणार्थ चातुर्मास व्रत के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं तब हिंदू धर्म के सभी शुभ एवं मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।
राज गुरुजी ने आगे बताया कि धर्म ग्रंथों के अनुसर सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु को देवोत्थान एकादशी पर विशेष पूजा करके उन्हें योग निद्रा से जगाया जाता है और इसी दिन चातुर्मास व्रत समाप्त हो जाता है। इसी के साथ सनातन धर्म में सभी मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश, हवन यज्ञ समस्त धार्मिक कार्य शुरू हो जाते हैं।
शुक्रवार से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएगे। मगर इस बार शुक्र ग्रह अस्त होने से देवोत्थान एकादशी पर विवाह का मुहूर्त नहीं है, इसलिए इस बार शुभ विवाह मुहूर्त 24 नवंबर से शुरू होगे।
नवंबर माह से 2022 के शेष शुभ विवाह मुहूर्त
नवंबर महीने में शुभ विवाह मुहूर्त 24, 25, 26 को रहेगा तो वहीं दिसंबर महीने में शुभ विवाह मुहूर्त 2, 3, 7, 8, 9, 13, 14, 15, 16 को रहेगा। इसके बाद धनु की संक्रांति पर खरमास शुरू हो जाएगा। दोबारा से विवाह के शुभ मुहूर्त 15 जनवरी 2023 से शुरू होंगे।
देवोत्थान एकादशी की महिमा
जो लोग पूरी साल की एकादशी का व्रत नहीं रख पाते है,
उनको केवल देवोत्थान एकादशी का व्रत करने से वर्ष भर की सारी एकादशीयों का पुण्य, फल, प्राप्त हो जाता है। सभी मनोरथ, त्रिलोक की हर दुर्लव वस्तु भी सहज ही प्राप्त हो जाती है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है, और उनके पूर्वजों को सायुज्य मुक्ति मिलती।
एकादशी में इन बातों का पालन करना जरूरी
बाल, दाढ़ी व नाखून न काटे, ब्रह्मचर्य का पालन करें.
सोएं नहीं, जीव जंतुओं की हत्या न करें,
तुलसी दल को न तोडे़, मसूरकीदाल, बैंगन, लहसुन, प्याज, मांस तामसी भोजन, शराब आदि का सेवन न करें, किसी की बुराई, झूठ, चुगली, बुजुर्गों का अपमान, घर में क्लेश करने से सारे पुण्य नष्ट हो जाते हैं और पाप का भागीदार बनता है।
एकादशी में करें यह उत्तम कार्य
संभव हो तो एकादशी के दिन गंगा स्नान करना चाहिए,
केसर, केला, हल्दी, आंवला, सिंघाडा़, शकरकंदी, गन्ना, बादाम का दान एवं ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने से धन, मान-सम्मान और संतान सुख के साथ मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है एवं पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है।
देवोत्थान एकादशी तिथि
एकादशी तिथि प्रारंभ:03 नवंबर, गुरुवार, सायं 07:31 से एकादशी तिथि समापन: 04 नवंबर, शुक्रवार, सायं 06:09 तक
देवउठनी एकादशी पूजा मुहूर्त
पूजा मुहूर्त: 04 नवंबर, प्रातः 06: 35 से प्रातः 10: 42 तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: प्रातः 07:57 से प्रातः 09:20 तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: शुक्रवार, प्रातः 09:20 से प्रातः10: 42 तक
एकादशी व्रत का पारण तिथि : 05 नवंबर, शनिवार
पारण समय: प्रातः 06:36 से प्रातः 08:47 के मध्य
द्वादशी तिथि समाप्त: सायं 05:07 मिनट पर
तुलसी विवाह का महत्व
जो भक्त विष्णु प्रिया तुलसी और श्रीहरि शालिग्राम का द्वादशी युक्त हरिप्रबोधिनी एकादशी में विवाह करते हैं, उनके पिछले जन्मों के सब पाप नष्ट हो जाते हैं,साथ ही पुण्यों का उदय होता है,और उनको वैवाहिक जीवन का आनंदपूर्ण सुख मिलता है, पति पत्नी के प्रेम एवं सुख,समृद्धि में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है, तुलसी विवाह के अगले दिन तुलसी का पौधा किसी ब्राह्मण को दान करना शुभ माना जाता है।
तुलसी विवाह 5 नवंबर को किया जायेगा
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 04 नवंबर को शाम 06 बजकर 10 मिनट से शुरू
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 05 नवंबर को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर समाप्त
