जालंधर (R24N) : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब टूरिज्म एवं कल्चरल बोर्ड के सलाहकार दीपक बाली ने बीबीएमबी से हरियाणा को अतिरिक्त 8500 क्यूसेक पानी देने के फैसले की कड़ी निंदा की। दीपक बाली ने इस मुद्दे पर यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। उनके साथ आप नेता चंदन ग्रेवाल, तरनदीप सिंह सनी, हरसिमरनजीत सिंह और आई एस बग्गा मौजूद थे। मीडिया को संबोधित करते हुए बाली ने कहा कि पंजाब जो पांच दौरेयाओं की धरती है, उसके साथ केंद्र सरकार लगातार धक्का कर रही है। सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि केंद्र में जो भी पार्टी सत्ता में आई उसने पंजाब के साथ हमेशा धक्का ही किया है।
उन्होने कहा कि हरियाणा और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार है। इसलिए हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार के साथ मिल कर बीबीएमबी से हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने का आर्डर पास करवा लिया, जो पंजाब के साथ सरासर धक्का है। जबकि पंजाब के पास बिल्कुल भी अतिरिक्त पानी नहीं है।
दीपक बाली ने कहा कि बीबीएमबी हरियाणा को जितना पानी मिलना चाहिए, उससे ज्यादा पानी दे चुकी है। लेकिन केंद्र सरकार जिस प्रकार फैसले लेती है उससे लगता है कि वह राज्यों के अधिकारों को खत्म करना चाहती है।
उन्होने बताया कि एक तरफ इन्होंने पानी का आर्डर पास करवाया ही और दूसरी तरफ वाटर रेगुलेटरी एक्ट के तहत बीबीएमबी के जो अधिकारी हमेशा पंजाब का रहा है, उन्हें देर रात ट्रांसफर कर उसकी जगह हरियाणा कैडर का ऑफिसर लगाया दिया गया। इसलिए यह सिर्फ आम आदमी पार्टी का मुद्दा नहीं है बल्कि यह पूरे पंजाब के वजूद का मुद्दा है। आने वाली पीढ़ियों का मुद्दा है।
उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही अन्य राज्यों को पानी दिया गया तो पंजाब में पानी की किल्लत आने की पूरी संभावना है। उन्होंने चेतावर्नी देते हुए कहा कि हरियाणा को पानी का एक भी अतिरिक्त बंद नहीं दी जाएगी। इसके लिए चाहै कितना भी संघर्ष करना पड़े। पंजाब पहले भी अपने अधिकारों के लिए लड़ता रहा है। अब्दाली को अगर किसी ने रोका तो वो सिर्फ पंजाबियों ने पंजाब की धरती पर रोका। आजादी की लडाई में भी पंजाबियों का अहम योगदान रहा। राज्यों के अधिकारों के लिए भी केंद्र के साथ हमारी लड़ाई रही है।
उन्होने आगे कहा कि जब पानी का बंटवारा हुआ था तब हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी का जन्म भी नहीं हुआ था। उनके जन्म के पहले से ही पानी का बंटवारा हुआ। आज वो पंजाब में आकर भाजपा को स्थापित करने की बात कर रहे हैं। दरअसल केंद्र सरकार पंजाब के अधिकारों को छीनना चाह रही है।
